अध्याय 465

कायलन

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दो महीने पहले

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मैंने कोशिश की कि उसी में सांस लेता रहूँ, लेकिन नहीं ले पाया। परछाईं आधी भीतर घुस चुकी थी, मुझे घोंट रही थी। वही एहसास जो मैं पहले भी एक बार महसूस कर चुका था—बस इस बार हज़ार गुना बदतर।

वो ताक़त बहुत ज़्यादा थी, बहुत अँधेरी…

मेरा शरीर बस जवाब देने ही वाला थ...

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